Mp board best of five yojana 2022 -2023 : बेस्ट ऑफ फाइव योजना बंद करने का निर्णय रद्द

 MP Board Best Of Five Scheme 2022 - 2023 बेस्ट ऑफ फाइव योजना  है या नहीं

बेस्ट ऑफ फाइव है या नहीं 2023 में बेस्ट ऑफ फाइव है कि नहीं 

माध्यमिक शिक्षा मंडल की दसवीं परीक्षा में अब संस्कृत वैकल्पिक विषय रहेगा। दूसरी तरफ दसवीं का रिजल्ट गिरने के डर के कारण स्कूल शिक्षा विभाग विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करते हुए बेस्ट आफ फाइव को समाप्त करने का निर्णय नहीं ले पा रहा है।

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 जबकि माध्यमिक शिक्षा मंडल बेस्ट आफ फाइव की कमियां गिनाते हुए उसे समाप्त करने का प्रस्ताव प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा के पास भेज चुका है।

संस्कृत या एनएसक्यूएफ में से कोई एक विषय ले सकते है। इस संबंध में मंडल ने निर्देश जारी कर दिए है। हालांकि विभागीय अधिकारियों की माने तो मंडल के संस्कृत को वैकल्पिक विषय करने के संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग सहमत नहीं है। 




आगामी सोमवार तक स्कूल शिक्षा विभाग मंडल के उक्त आदेश को निरस्त कर सकता है। जबकि मंडल का संस्कृत को वैकल्पिक विषय के रूप में लेने के संबंध में तर्क यह है कि अंग्रेजी को वैकल्पिक विषय किया, तो विद्यार्थी सबसे पहले इसे छोड़ेंगे। 



जबकि निर्णय वर्तमान समय में प्रतियोगी परीक्षा समेत हर क्षेत्र में अंग्रेजी की जरूरत है। शासन पहले ही बेस्ट आफ फाइव लागू करके विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है। यदि अंग्रेजी को भी वैकल्पिक विषय के रूप में किया गया, तो आगामी समय में छात्र के भविष्य पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा ।

बेस्ट आफ फाइव को लेकर शासन नहीं ले पा रहा निर्णय

माध्यमिक शिक्षा मंडल की दसवीं परीक्षा में वर्तमान नवीन शैक्षणिक सत्र से बेस्ट आफ फाइव को समाप्त करने का प्रस्ताव शासन को भेज चुका है । यह प्रस्ताव माशिमं की पाठ्यचर्या समिति ने भेजा है। मंडल ने बेस्ट आफ फाइव की ढेरों को कमियां गिनाई है। 



इसमें मप्र के विद्यार्थियों को आर्मी के फार्म भरने के योग्य न होने तक की बात कही गई है। बावजूद इसके स्कूल शिक्षा विभाग छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करते हुए उसे समाप्त करने का निर्णय नहीं ले पा रहा है।

रिजल्ट गिरने के कारण तो निर्णय नहीं ले पा रहा विभाग

मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल की दसवीं परीक्षा में विद्यार्थियों का रिजल्ट बढ़ाने के लिए वर्ष 2017 में बेस्ट आफ फाइव योजना को लागू किया गया है। इस योजना के तहत दसवीं के छह विषयों में पांच विषय में पास होना अनिवार्य है।

इस योजना के लागू होने के बाद अधिकांश छात्रों ने एक विषय के रूप में गणित व अंग्रेजी को पढ़ना बंद कर दिया। इसे देखते हुए माध्यमिक शिक्षा मंडल ने दसवीं में बेस्ट आफ फाइव को समाप्त करने के लिए अक्टूबर 2020 में अनुशंसा की । लेकिन इसके बाद कोरोना के चलते इसे समाप्त करने पर विचार नहीं नहीं किया। 

अब एक बार फिर से मंडल की पाठ्यचर्या समिति की बीते मई में आयोजित बैठक में इसे दोबारा समाप्त करने का निर्णय लिया है। मंडल की तरफ से बेस्ट आफ फाइव कमियां गिनाते हुए उसे समाप्त करने की नस्ती मंत्रालय में भेज दी गई।

स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों की माने तो बेस्ट आफ फाइव को समाप्त किया, तो दसवीं में 11 फीसदी परिणाम गिर जाएगा। हालांकि स्कूल शिक्षा विभाग को आंकड़ों की बाजीगिरी देखना है या विद्यार्थियों का भविष्य ।

मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल की दसवीं परीक्षा में छह विषय होते है। इसमें हिंदी अंग्रेजी, संस्कृत, सामाजिक विज्ञान, गणित व विज्ञान शामिल है। साथ नेशनल स्किल्स क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) के विषय भी रहेंगे। इससे दसवीं में कुल सात में विषय हो रहे है। इस संबंध में मंडल ने निर्देश जारी किए है कि दसवीं के विद्यार्थियों को हिंदी व अंग्रेजी लेना अनिवार्य होगा। साथ ही विज्ञान, गणित व सामाजिक विज्ञान मुख्य विषय रहेंगे। छटवें विषय के रूप में विद्यार्थी 




 माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की दसवीं परीक्षा में अब संस्कृत वैकल्पिक विषय रहेगा, जबकि हिंदी व अंग्रेजी भाषा लेना अनिवार्य होगा। मंडल 2022-23 के सत्र से यह व्यवस्था लागू करने जा रहा है। दसवीं परीक्षा में छह विषय होते है। इसमें हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, सामाजिक विज्ञान, गणित व विज्ञान विषय शामिल हैं। साथ ही नेशनल स्किल्स क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) के विषय भी रहेंगे। इस तरह दसवीं में कुल सात विषय हो रहे हैं। मंडल ने निर्देश जारी किए हैं कि दसवीं में हिंदी और अंग्रेजी लेना अनिवार्य होगा। साथ ही विज्ञान, गणित व सामाजिक विज्ञान मुख्य विषय रहेंगे। छठवें विषय के रूप में विद्यार्थी संस्कृत या एनएसक्यूएफ में से कोई एक विषय ले सकते हैं। 




इस संबंध में मंडल ने निर्देश जारी कर दिए हैं। हालांकि विभागीय अधिकारियों की मानें तो मंडल के संस्कृत को वैकल्पिक विषय करने के संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग सहमत नहीं है। सोमवार तक स्कूल शिक्षा विभाग मंडल के उक्त आदेश को निरस्त कर सकता है, जबकि मंडल का संस्कृत को वैकल्पिक विषय के रूप में लेने के संबंध में तर्क यह है कि अंग्रेजी को वैकल्पिक विषय किया तो विद्यार्थी सबसे पहले इसे छोड़ेंगे, जबकि वर्तमान समय में प्रतियोगी परीक्षा समेत हर क्षेत्र में अंग्रेजी की जरूरत है। यदि अंग्रेजी को भी वैकल्पिक विषय के रूप में किया गया तो आगामी समय में छात्र के भविष्य पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। दरअसल, माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा एकवार फिर से सत्र 2022-23 के लिए संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इस निर्देश के अनुसार सभी विद्यार्थियों को भाषा विषय में हिंदी और अंग्रेजी लेना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा तृतीय भाषा के रूप में विद्यार्थी कौशल आधारित विषय का चयन तृतीय भाषा के स्थान पर किया जा सकेगा।

Sanskrit will now be an optional subject in the tenth examination of the Board of Secondary Education (Mashim), while it will be mandatory to take Hindi and English languages. The Board is going to implement this system from the session 2022-23. There are six subjects in the tenth examination. It includes Hindi, English, Sanskrit, Social Science, Mathematics and Science subjects. There will also be topics from the National Skills Qualification Framework (NSQF). In this way there are total seven subjects in 10th class. The Board has issued instructions that it will be mandatory to take Hindi and English in class X. Also, Science, Mathematics and Social Science will be the main subjects. As a sixth subject, students can take either Sanskrit or NSQF. The Board has issued instructions in this regard. However, according to the departmental officers, the Sanskrit of the Mandal is an optional subject.

Mp board best of five scheme 2022 -2023

The School Education Department does not agree with regard to Till Monday, the School Education Department can cancel the said order of the Board, while the argument regarding taking Sanskrit as an optional subject of the Board is that if English is made an optional subject, then the students will leave it first, whereas at present the competitive English is needed in every field, including exams. If English is also made as an optional subject, then the future of the student will be adversely affected in the future. Actually, once again revised guidelines have been issued by the Board of Secondary Education for the session 2022-23. According to this instruction, it has been made compulsory for all the students to take Hindi and English in the language subject. Apart from this, student skill based subject can be selected in place of third language as third language.




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