Mp Board Exam 2022 : syllabus नहीं हुआ पूरा कैसे देंगे परीक्षा

 बोर्ड कक्षाओं के विद्यार्थियों में चिंता का आलम कोरोना के चलते स्कूलों का पठन-पाठन काफी प्रभावित रहा है। स्थिति ये है कि स्कूलों में नियमित कक्षाओं का संचालन न होने एवं ऑनलाइन पठन-पाठन की सुविधा अधिकांश विद्यार्थियों को न मिलने के कारण उनकी पढ़ाई सही तरीके से नहीं हो सकी है। उधर प्रदेश सरकार द्वारा आनन-फानन में वार्षिक परीक्षाएं आयोजित करने के लिए समयसारिणी जारी कर दी गई है। जारी समयसारिणी के अनुसार बोर्ड कक्षाओं शुरू होने वाली हैं।

Syllabus नहीं हुआ पूरा


 पाठ्यक्रम अधूरा: कैसे वार्षिक परीक्षा देंगे छात्र-छात्राएं कोरोना के चलते विद्यालयों के बंद होने के दौरान ऑनलाइन कक्षाओं के संचालन की व्यवस्था बनाई गई थी उसमें भी अधिकांश छात्रों के पास स्मार्ट मोबाइल न होने के कारण वह पठन- पाठन नहीं कर सके। ऑनलाइन क्लासों का संचालन करने में संबंधित शिक्षक भी पूरी तरह से लापरवाह बने रहे। बड़े विद्यालयों को छोड़ दिया जाय तो अन्य विद्यालयों में ऑनलाइन पठन-पाठन की व्यवस्था भी शिक्षकों द्वारा नहीं बनाई गई थी। इसके अलावा शासकीय विद्यालयों में शिक्षकों के काफी पद खाली पड़े हुए हैं। इस वजह से कई विषयों की पढ़ाई भी नहीं हो सकी। ये अवश्य है कि हाई स्कूल एवं हायर सेकण्ड्री स्कूलों में अतिथि शिक्षकों की व्यवस्थाएं बनाई गई थी किन्तु इसका लाभ भी ज्यादातर विद्यालयों में इसलिए नहीं मिल सका क्योंकि कोरोना के चलते काफी देर से शुरू हुआ। इसके अलावा विद्यालयों में कोरोना संक्रमण के बढ़ते पाठ्यक्रम अधूरा होने के कारण विद्यार्थी सांसत में है कि वो कैसे परीक्षाएं देंगे। बोर्ड कक्षाओं के अलावा अन्य कक्षाओं की कॉपियां विद्यालय स्तर पर ही जंचने के कारण विद्यार्थी इस बात को की परीक्षाएं 17 फरवरी से लेकर निश्चिंत है कि वो अनुत्तीर्ण नहीं काफी विलंब के साथ शुरू हुआ है। विद्यालयों में पढ़ाई का सिलसिला ही किया गया है फिर भी परीक्षा देने की होंगे किन्तु हाई स्कूल एवं हायर सेकण्ड्री में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की कॉपी बाहर जंचने के कारण उनमें सबसे ज्यादा चिंता बनी हुई है। चर्चा के दौरान बोर्ड कक्षाओं के कई विद्यार्थियों ने कहा कि परीक्षाओं का आयोजन प्रदेश सरकार द्वारा काफी जल्दबाजी में किया जा रहा है। उधर कोरोना संक्रमण के चलते विद्यालयों में पठन-पाठन का कार्य जिसके चलते विद्यालयों में सही तरीके से पढ़ाई तक नहीं हो सकी। शासन द्वारा खतरे के चलते कक्षाओं का संचालन भी समुचित तरीके से नहीं हो सका। स्थिति ये रही कि कोरोना के चलते हाई स्कूल एवं हायर सेकण्ड्री स्कूलों में पठन पाठन का कार्य सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है। वहीं कक्षा 1 से 8वीं तक की पढ़ाई भी समुचित व्यवस्थाओं के अभाव में इस वर्ष पूरी तरह से बाधित रही है। प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी के चलते विद्यालय खोलने की महज औपचारिकताएं ही हुई हैं। प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में इस वर्ष अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति भी न होने एवं शिक्षकों की भारी कमी के चलते अधिकांश स्कूलों पाठ्यक्रम आधा अधूरा है। शहरी क्षेत्रों के विद्यालयों को छोड़ दिया जाय तो ग्रामीण क्षेत्रों में तो स्थिति यह है कि कई विद्यालयों में आधा कोर्स भी शिक्षकों द्वारा नहीं पूरा मजबूरी बन गई है।

Due to Corona, the education of schools has been greatly affected due to the concern among the students of board classes. The situation is that due to non-conduct of regular classes in schools and online learning facility is not available to most of the students, their studies have not been done properly. On the other hand, the timetable has been issued by the state government to conduct the annual examinations in a hurry. According to the released timetable, the board classes are about to start.


  Syllabus incomplete: How students will give annual examinations, during the closure of schools due to Corona, arrangements were made to conduct online classes, in that too most of the students could not study due to lack of smart mobiles. The teachers concerned also remained completely careless in conducting online classes. Barring big schools, the system of online learning in other schools was not even made by the teachers. Apart from this, many posts of teachers are lying vacant in government schools. Because of this many subjects could not even be studied. It is necessary that arrangements for guest teachers were made in high school and higher secondary schools, but its benefit could not be found in most schools because it started very late due to Corona. Apart from this, due to the increasing course of corona infection in schools being incomplete, the students are in a dilemma as to how they will give the examinations. Apart from the board classes, due to the copies of other classes being checked at the school level itself, the students are sure that the examinations have started from February 17 with a lot of delay and not failed. The process of studies has been done in the schools, yet they will have to take the examinations, but the students studying in high school and higher secondary are worried the most due to the copy being out of them. During the discussion, many students of board classes said that the examinations are being organized by the state government in a hurry. On the other hand, due to the corona infection, the work of education in schools could not be done properly due to which the schools could not even study properly. Due to the danger by the government, the classes could not be conducted properly. The situation was that due to Corona, the work of teaching in high school and higher secondary schools has been affected the most. At the same time, the education of classes 1 to 8 has also been completely disrupted this year due to lack of proper arrangements. Due to acute shortage of teachers in primary and secondary schools, only formalities have been done to open schools. Due to non-appointment of guest teachers in primary and secondary schools this year and acute shortage of teachers, most of the schools syllabus is half incomplete. Leaving aside the schools in urban areas, the situation in rural areas is such that in many schools even half the course has become a complete compulsion, not by the teachers.

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